| आरंभ |
: |
जनवरी,
1977 |
| औसत
श्रेणी |
: |
+ 66 % एफई |
| शेष भण्डार |
: |
240.10 मि.टन (अप्रैल,
08) |
| उत्पाद |
: |
पिण्ड –150
एमएम + 10
एमएम चूर्ण
–10
एमएम |
| सीएलओ |
: |
10 एमएम से 40
एमएम |
| क्षमता |
: |
आरओएम
अयस्क 6 मि.
टन/प्रतिवर्ष |
| निर्यात
पत्तन |
: |
वैजाग
ऑउटर हारबर,
क्षमता या
शिप
हैडलिंग
1,30,000 डीडब्ल्यूटी
तक
|
| वैजाग
रेल लिंक |
: |
471 कि.मी. |
| कर्मचारियों
की संख्या |
: |
1784 (अप्रैल,
09) |
-
डीपीआर
एनएमडीसी
द्वारा
तैयार किया
गया।
-
अधिकांश
रूप से देश
में उपलब्ध
जानकारी और
उपकरणों से
निर्मित।
-
इसके पास
सबसे बड़ा
देशीय
जिरेटरी
क्रशर (60’’
x 89’’) है।
-
भारत की
खानों में
सबसे बड़ी 2.5
कि.मी. लम्बी
डाउनहिल कन्वेयर,
2.3 कि.मी.
लम्बी
सुरंग से
गुजरती है,
जिसकी ढलान 5
डिग्री है और
जो कठिन
क्षेत्रों
एवं संस्तर
के माध्यम
से दोनों
किनारों पर
चलाई जाती
है।
एक
उच्च
यंत्रीकृत
वेट स्क्रीनिंग
संयंत्र और
रेलवे
वैगनों में
पिण्ड अयस्क
की स्टेकिंग,
रीक्लेमिंग
तथा लदान (2500 टन/घण्टा)
की सुविधा
सहित।
वर्ष
1987 में इस्पात
उद्योग में
चूर्ण की
बढ़ी हुई
मांग को पूरा
करने हेतु
रिक्लमेशन,
लौह अयस्क
की वैगनों
में लदाई के
लिए 2.8 मि.टन
प्रति वर्ष
की क्षमता
वाली
यंत्रीकृत
सम्हलाई
पद्धति को
जोड़ लिया
गया। इसे
फरवरी, 2001 में
आईएसओ 9001:2000
प्रमाण पत्र
प्रदान किया
गया। |